
दुर्ग–भिलाई में सरकारी भूमि मूल्य में की गई 300%–400% की अचानक वृद्धि ने आम जनता की उम्मीदों और धैर्य को झकझोर कर रख दिया है। बीते 7 दिनों से लगातार आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों और युवाओं का एक शांत लेकिन बेहद मज़बूत आंदोलन ज़मीन पर दिखाई दे रहा है।
आज 30 नवम्बर को हुआ बड़ा ‘शांति हवन’ — छतीसगढ़ सरकार और वित्त मंत्री को सद्बुद्धि मिले, यही प्रार्थना
आज दुर्ग चौक पर जनता ने शांतिपूर्ण तरीके से विशाल हवन किया।

इस हवन का मुख्य संदेश था—
वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी को सद्बुद्धि मिले… ताकि वे जनता की तकलीफ समझ सकें।”
हवन में जन शक्ति मोर्चा , मज़दूर, किसान भाई, व्यापारी और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और साफ कहा—
“हमारा विरोध शांत है… पर कमज़ोर नहीं।”
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें नाकाम — जनता का साहस अडिग
शासन द्वारा आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई,
लेकिन जनता डटी रही।
एक बुजुर्ग किसान की लाइन आज भी भीड़ में गूंजती रही—
“ हम घर बनाने के लिए पाई-पाई जोड़ते हैं… और सरकार एक झटके में जमीन के भाव आसमान पर चढ़ा देती है। ”
1 दिसम्बर: पटेल चौक संघर्ष का केंद्र — 1 बजे से ऐतिहासिक चक्का जाम
प्रदर्शनकारी संगठनों ने घोषणा की है कि
1 दिसम्बर दोपहर 1 बजे से पटेल चौक पर विशाल ‘उद्रस–चकाजाम’ होने जा रहा है।
हजारों की भीड़ में—
• किसान
• मजदूर
• छोटे व्यापारी
• आम नागरिक
• युवा
सब उतरने वाले हैं।
जनता की पीड़ा: रजिस्ट्री बंद, EMI शुरू… सपने अधूरे
लोगों का गुस्सा इसलिए भी बढ़ा है कि—
• सरकारी वैल्यू 300–400% बढ़ गई।
• बैंक लोन पास , EMI शुरू… लेकिन जमीन ले नही पारहे
• रजिस्ट्री – बढ़े टैक्स के कारण रुकी हुई
• मध्यम व गरीब वर्ग के सपनों का घर बीच में अटक गया
5 डिसिमिल जमीन का रेट अच्छी लोकेशन पर 3000–4000 प्रति वर्गफीट तक पहुँच चुका है,
जो करीब 66 लाख बनता है— तो घर बनाने के लिए पैसे कहा से आएँगे
लेकिन छत्तीसगढ़ की आम नागरिक कमाई के हिसाब से यह एक असंभव स्तर है।
जनता का आरोप: ये नीतियां गरीबों पर सीधा प्रहार
लोगों का साफ आरोप है कि—
• नई सरकार आते ही कांग्रेस द्वारा घटाए शुल्क फिर बढ़ाए गए
• फिर 5 डिसिमिल जमीन का नियम
• और अब बाजार मूल्य में आग—300%–400% की बढ़ोतरी
यह सब मिलकर सीधे गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ रहा है।
पुलिस प्रशासन की चेतावनी — आंदोलनकारी बोले, “हम पीछे नहीं हटेंगे”
चक्का जाम की घोषणा के बाद पुलिस ने एक बार कड़ा रुख दिखाया और चेतावनी भी दी,
लेकिन संगठनों ने साफ जवाब दिया—
“ हम शांति से विरोध करेंगे… पर पीछे हटने वाला कोई नहीं ।”
कल का दिन ऐतिहासिक हो सकता है …
30 नवम्बर के शांति हवन के बाद जनता और अधिक एकजुट, और अधिक मजबूत होकर उठी है।
युवाओं ने साफ संदेश दिया—
“ अगर सरकार अनसुनी करती रही …
तो 1 दिसम्बर को दुर्ग थमेगा, और जनता की आवाज़ गूंजेगी।”
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