Chhath Puja During Pregnancy: गर्भवती महिलाएं ऐसे करें छठ पूजा, जानें सुरक्षित व्रत रखने के तरीके…

Chhath Puja During Pregnancy: छठ पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे सूर्य देव और छठी मइया की आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व साल में दो बार आता है — चैत्र माह और कार्तिक माह में। कार्तिक छठ को विशेष रूप से बड़ा माना जाता है क्योंकि इस समय श्रद्धालु चार दिनों तक नियमपूर्वक उपवास और पूजा करते हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) के लिए इस दौरान लंबे निर्जला व्रत (बिना पानी के उपवास) रखना कई बार स्वास्थ्य के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है।
क्या गर्भावस्था में छठ पूजा का व्रत रखना सुरक्षित है?
गर्भावस्था में शरीर को पर्याप्त पानी, पोषण और विश्राम की ज़रूरत होती है।
निर्जला व्रत रखने से—
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शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकती है,
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ब्लड प्रेशर गिर सकता है,
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और कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्या भी हो सकती है।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को पूर्ण निर्जला उपवास से बचना चाहिए।
अगर श्रद्धा है तो ऐसे करें छठ पूजा (Safe Ways to Perform Chhath Puja in Pregnancy)
अगर आप छठ मइया की पूजा पूरे मन से करना चाहती हैं, तो कुछ सरल बदलाव अपनाकर भी व्रत कर सकती हैं —
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डॉक्टर से सलाह लें – व्रत शुरू करने से पहले अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर करें।
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फलाहार व्रत रखें – निर्जला उपवास की जगह आप हल्का फल, दूध, नारियल पानी, साबूदाना खिचड़ी या फलों का रस ले सकती हैं।
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मानसिक रूप से पूजा करें – अगर शारीरिक रूप से असुविधा हो तो छठ मइया के भजन सुनें या ध्यान लगाएं।
छठ पूजा के दौरान ये सावधानियां ज़रूर बरतें (Precautions for Pregnant Women During Chhath)
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लंबे समय तक पानी में खड़े रहने से बचें।
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संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य के समय कुछ मिनटों के लिए ही जल में रहें।
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परिवार के सदस्य पूजा की तैयारियों में आपकी मदद करें।
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थकान या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत आराम करें।
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पूजा के दौरान हवादार और सुरक्षित जगह पर रहें।
छठ पूजा में श्रद्धा और सेहत दोनों जरूरी (Faith with Health)
छठ मइया की आराधना का मूल भाव आस्था, अनुशासन और कृतज्ञता है। अगर गर्भवती महिलाएं पूर्ण निर्जला व्रत न भी रखें, तो भी छठ मइया की कृपा प्राप्त कर सकती हैं। सेहत का ध्यान रखते हुए फलाहार व्रत करना सबसे सही विकल्प है। इससे न केवल आपकी श्रद्धा बनी रहती है, बल्कि मां और बच्चे की सेहत भी सुरक्षित रहती है।
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